किसी भी तरह की शारीरिक व मानसिक चोट हो सकती है आघात डॉ. प्रदीप

देवघर-: विश्व आघात दिवस प्रतिवर्ष 17 अक्टूबर को मनाया जाता है। विश्व आघात दिवस जीवन को सबसे नाज़ुक क्षणों के दौरान बचाने और सुरक्षा के महत्व पर ध्यान केंद्रित करने तथा आघात से होने वाली मृत्यु से बचने की तैयारी एवं महत्वपूर्ण उपायों को अपनाने के लिए मनाया जाता है। मौके पर साइंस एंड मैथेमेटिक्स डेवलपमेंट आर्गेनाईजेशन के राष्ट्रीय सचिव डॉ. प्रदीप कुमार सिंह देव ने कहा – विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार विश्वभर में मृत्यु एवं विकलांगता का प्रमुख कारण आघात है। आघात का मतलब, किसी भी तरह की शारीरिक एवं मानसिक चोट हो सकती है। इस तरह की चोटों के कारणों की कई वज़ह जैसे कि सड़क दुर्घटना, आग, जलना, गिरना, प्राकृतिक या मानव निर्मित आपदाएँ और हिंसक कृत्य तथा कमज़ोर आबादी “महिलाओं, बच्चों एवं बुजुर्गों” के ख़िलाफ़ होने वाले अपराध हो सकते हैं।

इन सभी कारणों के मध्य विश्वभर में आघात का प्रमुख कारण सड़क यातायात दुर्घटना है। कई तरह की चोट अस्थायी या स्थायी विकलांगता को पैदा करती है। जबकि अन्य तरह की चोट मृत्यु का कारण भी हो सकती है। भारत में हर छह मिनट पर एक व्यक्ति सड़क दुर्घटना के कारण मौत का शिकार हो जाता है। दिल्ली की सड़कों पर फर्राटा भर रहे वाहनों ने वर्ष 2015 में छह सौ से अधिक लोगों की जान ले ली। वहीं आंकड़ों के मुताबिक जनवरी 2016 से सितंबर तक करीब छह सौ लोगों की मौत हो चुकी है। वर्ष 2014 में यहां दुर्घटना में मरने वालों की संख्या 546 थी। यह आंकड़े ट्रैफिक पुलिस से प्राप्त हुए है। विशेषज्ञों का कहना है कि इन हादसों से बचने के लिए अगर वाहन चालक सिर्फ ट्रैफिक नियम का पालन करें तो 60 प्रतिशत तक कमी आ सकती है।

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